बड़ी खबर : मजदूरों से भरी पिकअप वाहन दुर्घटनाग्रस्त ,16 की मौत

धार। जिले के तिरला थाना क्षेत्र में बुधवार रात एक सड़क हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई है, जबकि अनेक लोग घायल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटे के पास मजदूरों से भरी पिकअप वाहन और स्कॉर्पियो के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबर्दस्त था कि मौके पर ही 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों की मौत अस्रपताल ले जाते समय और उपचार के दौरान हुई। हादसे में अब तक 16 लोगो की मौत हो चुकी है। कई लोगों की हालत नाजुक है। इस लिए हादसे में मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
घायलों में कई लोगों की हालत गंभीर
रात करीब 8:15 से 8:20 बजे के बीच अचानक पिकअप वाहन असंतुलित होकर सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गई। टक्कर के बाद पिकअप पलट गई, जिससे उसमें सवार मजदूर नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और दबे हुए लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल धार जिला चिकित्सालय ले जाया गया। जहां एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के आने से अफरा-तफरी पैदा हो गई।
सीएम यादव ने की आर्थिक मदद की घोषणा
हादसे की सूचना मिलते ही तिरला थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरु कराया। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि कई घायलों की स्थिति बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपए और सामान्य घायलों को 50-50 हजार आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने इंदौर के संभागायुक्त और आईजी को तुरंत धार पहुचने और घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
7 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया
कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि घायलों के इलाज को लेकर प्रशासन ने पर्याप्त व्यवस्था की है। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है। जबकि, करीब 15 घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में किया जा रहा है, जबकि 6 अन्य का उपचार निजी अस्पतालों में जारी है। कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि अस्पताल में हड्डी और फ्रैक्चर से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंदौर में भी डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है, ताकि घायलों को उपचार में कोई परेशानी नहीं हो।

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