छोटी सी चूक… और आरोपी बरी! बिलासपुर रेंज में खुली जांच की बड़ी खामियां, IG ने दी सख्त चेतावनी

बिलासपुर। जांच में जरा सी लापरवाही और आरोपी को मिल जाता है सीधा फायदा… इसी कड़वी सच्चाई ने बिलासपुर रेंज की पुलिस व्यवस्था को झकझोर दिया है, जहां फरवरी 2026 के दोषमुक्ति मामलों की समीक्षा में यह साफ सामने आया कि विवेचना की तकनीकी और प्रक्रियात्मक गलतियां ही आरोपियों के बच निकलने की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं, इसी गंभीर मुद्दे पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने रेंज स्तरीय बैठक में अभियोजन अधिकारियों के साथ सख्त समीक्षा की और स्पष्ट संदेश दिया कि अब जांच में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, मीटिंग में जांजगीर की पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल (IPS) समेत बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर, मुंगेली और पेण्ड्रा के अभियोजन अधिकारी मौजूद रहे, जहां संयुक्त संचालक अभियोजन आशीष झा ने उन अहम कमजोरियों को उजागर किया जिनका फायदा उठाकर आरोपी अदालत से बरी हो रहे हैं, आंकड़े भी चौंकाने वाले रहे—सत्र न्यायालय के 106 और अन्य न्यायालयों के 709 मामलों की समीक्षा में सामने आया कि कई मामलों में विवेचकों की छोटी-छोटी चूक ही पूरे केस को कमजोर कर देती है, आईजी गर्ग ने साफ कहा कि अब हर केस की जांच आधुनिक तकनीक और कानूनी मजबूती के साथ होनी चाहिए, बिना ठोस परीक्षण के चालान पेश नहीं होगा और अपील योग्य मामलों में तुरंत अपील करना अनिवार्य होगा, बैठक में ई-साक्ष्य और घटनास्थल की वीडियोग्राफी को बेहद अहम बताते हुए इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए, वहीं NDPS जैसे संवेदनशील मामलों में विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया ताकि प्रक्रियात्मक गलती से कोई आरोपी बच न सके, आईजी ने साफ कहा कि विवेचना के हर चरण में तकनीकी और कानूनी शुद्धता जरूरी है क्योंकि न्याय की डोर उसी पर टिकी है, उन्होंने रेंज के सभी विवेचकों से अपील की कि वे अपनी जांच प्रणाली को इतना सटीक बनाएं कि अदालत में कोई भी कमी न रह जाए और दोषियों को सजा मिल सके, बैठक के अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि इस समीक्षा के बाद जांच की गुणवत्ता सुधरेगी और सजा की दर में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी—फिलहाल साफ है, अब गलती की गुंजाइश खत्म और पुलिस जांच में परफेक्शन ही असली हथियार बनने जा रहा है।

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