क्या केवल लॉक डाउन ही कोरोना का इलाज है, व्यापारी संगठन उठा रहे सवाल

रायपुर। इतने लंबे लॉक डाउन के बाद अब ये प्रश्न उठ रहा है है कि क्या लॉक डाउन ही कोरोना का सटीक इलाज है। यह सवाल अब आम हो चुका है।
रवि भवन व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अर्जुनदास वासवानी कहते हैं पहले 25 मार्च से 14 अप्रैल तक याने पूरे 21 दिन का पहला लॉक डाउन किया गया। भारत जैसे गरीब देश के लिए पूरे 21 दिन अर्थव्यवस्था रोक देना कोई सरल कार्य नही है,फिर भी जनता ने इन 21 दिनों को सहर्ष स्वीकार कर इस लॉक डाउन को पूरा सहयोग प्रदान किया सिर्फ इस आशा में 21 दिन की मियाद पूरे होते ही उनका जीवन फिर से जैसे चलता था,चल पड़ेगा।इन 21 दिनों में जनता ने बहोत कठिन समय बिताया है।पर खेद के साथ ये कहना पड़ रहा है के न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारों ने इस लॉक डाउन का कोई लाभ उठा पाए सिवाय पुलिस द्वारा जनता पर डंडे बरसाने के।
श्री वासवानी के मुताबिक 19 दिनों का दूसरा लॉक डाउन आरम्भ हो चुका है ऐसे में होना तो ये चाहिए के इस लॉक डाउन के पीरियड में बड़े पैमाने पर ट्रेस एंड टेस्ट होने चाहिए जैसा के राहुल गांधी ने भी कहा है।राज्य सरकारों को भी टेस्ट किट खरीदने का अधिकार केंद्र सरकार को देना चाहिए ताकि राज्य सरकारें बड़े पैमाने पर टेस्ट कर सके।
भारत की अर्थव्यवस्था पहले ही नोटबन्दी और जीएसटी से तबाह हो चुकी थी और अब रही सही कसर ये कोरोना पूरा कर देगा।
हमारे छत्तीसगढ़ का भाग्य है कि इस प्रदेश को भूपेश बघेल जैसा जुझारू मुख्यमंत्री मिला है।जो विपक्ष में रहते हुए हमेशा गरीब जनता के लिए खड़े रहे।परंतु भूपेश जी को बहोत सी बातों का ख्याल रखना होगा।पीडीएस के द्वारा जो चावल गरीब जनता में बंटवाया जा रहा है कही इसमे कोई बड़ा भरस्टाचार न हो।मानसून लगने के पहले राज्य की सफ़ाई व्यवस्था को पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा दुरुस्त करना होगा।राज्य सरकार को लॉज डाउन में जो पास इशू हो रहे है इस पर भी ध्यान रखना होगा।ऐसा न के लॉक डाउन में सिर्फ जनता ही पुलिस के डंडे खाये और पहोंच मज़े से पास ले कर पूरे शहर का भ्रमण करते रहे।आगे राज्य में सिनेमा थेटर,मॉल और अन्य सार्वजनिक जगहों को पूर्णतः सेनेटीज़ करना अत्यंत आवश्यक है।लोक डाउन के दौरान पुलिस को जो डंडे चलाने की आदत हो गयी है,इस पर भी अंकुश ज़रूरी है।
अब चलिए अर्थव्यस्था पर बात करते है,भारत की जीडीपी 2014 तक 8% से आगे बढ़ रही थी जो कि 2016 के बाद नोटबन्दी और जीएसटी के कारण पहले ही 4% पर पहोंच चुकी थी,केंद्र और राज्य सरकारे इस जीडीपी को इतने लंबे लॉक डाउन के बाद कैसे संभाल पाएगी ये बड़ा प्रश्न है।इतने लंबे लॉक डाउन के बाद चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स हो या ऑटोमोबाइल या अन्य व्यापार,आसानी से वापस पटरी पर आने की संभावन असंभव है।छत्तीसगढ़ सरकार को अभी से इस पर विचार करने की आवयश्कता है।ये समय 20 अप्रैल के इंतज़ार करने का नही है बल्कि भूपेश सरकार को आज से उद्योग और व्यापार संघटनो से विचार आरम्भ करना चाहिए कि कैसे जिन जिलों में कोरोना का प्रकोप नही है वह 20 अप्रैल के बाद कार्य आरंभ किया जाए।उद्योग जगत को 40% श्रमिको के साथ जो उद्योग आरम्भ करने की परमिशन दी गयी है वो अफसरों के द्वारा वतनाकुलित चेम्बरो में बैठ कर बनाई हुई योजना के सिवाय कुछ नही है क्यूंकि 40% श्रमिको से कोई उद्योग काम कर ही नही सकता है।
पता नही भूपेश बघेल जी विपक्ष में रहते हुए गरीबो के लिए जितना संघर्ष करते थे इन दिनों उनकी ये पीड़ा कहा चली गई है,या ब्यूरोक्रेट्स का सरकार पर प्रभाव और दबाव अत्यधिक है।
व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से निवेदन किया है कि इन 4 दिनों में वो एक शसक्त योजना बना कर 21 अप्रैल से लॉक डाउन को समाप्त करे ताकि इस प्रदेश की गरीब और मेहनती जनता अपने अपने व्यवसाय में लगे और वो इस कठिन दौर से वापस उबर सके अन्यथा हमारे देश और राज्य ने पिछले 72 सालों में जो उन्नत्ति की है वो इस बेवजह के लॉक डाउन से बर्बाद हो जाएगी।

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