भारतमाला मुआवजा घोटाला: हाईकोर्ट से रोक हटने के बाद 3 पटवारी गिरफ्तार, करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए बड़े मुआवजा घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाए जाने के तत्काल बाद एक महिला सहित तीन तत्कालीन पटवारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गिरफ्तार किए गए पटवारियों में दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी टोकरो) और बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी भेलवाडीह) शामिल हैं। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने 2020 से 2024 के बीच सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाई।
जमीन के टुकड़े कर हड़पा मुआवजा
एसीबी-ईओडब्ल्यू के मुताबिक, इन पटवारियों ने सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम दिया। उनके खिलाफ मुख्य आरोप हैं:
दोहरी बिक्री: शासन द्वारा पहले से अधिग्रहित की गई भूमि को दोबारा फर्जी कागजात बनाकर शासन को ही बेचकर मुआवजा लेना।
रिकॉर्ड में हेरफेर: पुरानी तारीखों में (बैक डेट) भूमि का विभाजन (बंटवारा) और नामांतरण करना ताकि मुआवजे की राशि बढ़ाई जा सके।
प्रोक्सी भुगतान: सही भूमि स्वामी के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को मुआवजा राशि का भुगतान करना।
टुकड़ों में विभाजन: निजी भूमि को छोटे उपखंडों में अवैध रूप से विभाजित करना, जिससे मुआवजा राशि में कई गुना वृद्धि हुई और उसे हड़प लिया गया।
जांच अधिकारियों का कहना है कि पटवारियों की इस मिलीभगत से राज्य शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद आर्थिक नुकसान का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि यह घोटाला मुख्य रूप से जमीनों को कई टुकड़ों में बांटकर अंजाम दिया गया था।
NHAI की आपत्ति से खुला मामला
यह आर्थिक गड़बड़ी सबसे पहले तब सामने आई, जब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने मुआवजे के वितरण पर आपत्ति जताई। NHAI की आपत्ति के बाद जांच रिपोर्ट राजस्व विभाग के सचिव को भेजी गई, जिसके परिणामस्वरूप मुआवजा वितरण तत्काल रोक दिया गया था।
हाईकोर्ट से रोक हटने के बाद गिरफ्तारी
इस मामले में लिप्त आरोपियों ने पहले उच्च न्यायालय से अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवा ली थी। हालांकि, 28 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी। इसके तुरंत बाद एसीबी-ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई करते हुए तीनों पटवारियों को गिरफ्तार कर लिया।
इन आरोपियों के खिलाफ एसीबी में अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7C, 12, तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 467, 468, 471, 420, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए पटवारियों को अब विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले, 13 अक्टूबर को इसी मुआवजा घोटाले के संबंध में 2 जनसेवकों सहित कुल 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रथम अभियोग पत्र (चार्जशीट) विशेष अदालत में प्रस्तुत किया जा चुका है।
