टिकरापारा का ‘अंडा ठेला’ वाला बना करोड़पति सूदखोर, नेताओं-अफसरों से करीबी बनी आपराधिक साम्राज्य की नींव

रायपुर। टिकरापारा इलाके में कभी मामूली अंडे का ठेला लगाने वाले वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर अब सूदखोरी के लिए कुख्यात हो चुके हैं। इन दोनों भाइयों पर कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने और सूदखोरी व अवैध वसूली के जरिए करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी इस तेजी से बढ़ती संपत्ति का बड़ा कारण नेताओं और अफसरों से उनकी घनिष्ठता है।
वीरेंद्र और रोहित, जिन्होंने कभी टिकरापारा की संकरी गलियों में अंडे का ठेला लगाकर गुजारा किया, अब आलीशान घरों और महंगे वाहनों के मालिक हैं। आरोप है कि उन्होंने जरूरतमंद लोगों को भारी ब्याज दरों पर कर्ज देकर लूटा है, और जो लोग समय पर पैसा नहीं चुका पाते, उन्हें डरा-धमकाकर उनसे जबरन वसूली की जाती है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार वीरेंद्र सिंह तोमर का नाम पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है और वह हिस्ट्रीशीटर है। वर्ष 2019 में भी सूदखोर वीरेंद्र, उसके भाई रोहित और उसके अन्य साथियों के खिलाफ कोतवाली व पुरानीबस्ती थाने में बड़ी कार्रवाई हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उनके गैरकानूनी कार्यों पर लगाम नहीं लग पाई।
इस मामले पर पुलिस का कहना है कि उन्हें इस मामले से जानकारी है और जांच जारी है। वही पुलिस का कहना है कि , “हम सभी आरोपों को गंभीरता से ले रहे हैं और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
सूदखोरी से ऐसे बने रईस
आरोपी वीरेंद्र और रोहित सूदखोरी का धंधा भी करते हैं। जयदीप और नासिर को 8 फीसदी ब्याज पर पैसा दिया था। ब्याज की राशि तय समय पर देनी पड़ती थी, लेकिन अगर ब्याज की राशि तय समय पर कोई नहीं दे पाता था, तो अगले दिन से प्रतिदिन के हिसाब ब्याज लेते थे। जो ब्याज महीना में लगता था, अब उसे रोज वसूलते थे। 8 फीसदी ब्याज का पैसा नहीं देने पर गुंडों को घर भेजकर रकम की वसूली कराते थे। जमीन या अन्य महंगी चीजें अपने नाम पर करवाते थे। इस तरह दोनों भाई रातों-रात करोड़पति हो गए। बड़ा बंगला और महंगी गाड़ियां खरीद ली है।
पत्नी के अकाउंट में लेते पैसा, बैंक वाले को भगा देते
आरोपी वीरेंद्र और रोहित सूदखोरी के धंधे में ब्याज का पैसा अपनी पत्नी शुभ्रा तोमर और नेहा तोमर के बैंक खाते में लेते थे। इसके अलावा अपने कर्मचारी योगेश के खाते में भी लेते थे। पुलिस इनके खिलाफ भी जांच कर रही है। यूको बैंक के कर्मचारी भी वसूली नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल यूको बैंक से आरोपियों ने बीएमडब्ल्यू कार फायनेंस कराया था, लेकिन लोन नहीं चुकाया। कोर्ट ने वसूली का आदेश भी कर दिया है, लेकिन जब भी बैंक वाले आरोपियों के घर जाते थे, अपने बाउंसरों से उन्हें भगा देते थे।
18 लाख कर्ज दिया, अब तक 54 लाख वसूले
आरोपी वीरेंद्र और रोहित का सूदखोरी का बड़ा कारोबार है। ब्याज के नाम पर डरा-धमका कर वसूली करते थे। खम्हारडीह इलाके के जयदीप बैनर्जी ने वर्ष 2021 में वीरेंद्र और रोहित से अलग-अलग दिन मिलाकर कुल 18 लाख कर्ज लिया था। मूल राशि उतना ही है, लेकिन दोनों भाइयों ने जयदीप से अब तक 54 लाख वसूल लिए। फिर जयदीप कर्जामुक्त नहीं हो पाया है। इसी तरह दुर्ग के नासीर बश से भी लाखों रुपए वसूल लिए।
जमीन ही हड़प ली
भाठागांव निवासी मनीष साहू की आरोपी वीरेंद्र के घर के आसपास ही करीब 1100 वर्गफीट जमीन है। उसे डरा-धमकाकर उसकी जमीन के पेपर रख लिया। उसे जमीन बेचने नहीं दे रहा था। जब भी कोई ग्राहक आता था, तो उसे भगा देता था। उसे धमकी भी दी गई थी। पुलिस ने जयदीप, मनीष और नासिर की शिकायत पर पुरानीबस्ती पुलिस ने आरोपी वीरेंद्र सिंह, रोहित सिंह और दिव्यांश व अन्य के खिलाफ वसूली, कर्जा एक्ट और संगठित अपराध का केस दर्ज किया गया है। इस मामले में आरोपियों के भतीजे दिव्यांश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
कर्जा देकर अधिक वसूली, पैसे नहीं देने पर जमीन हथियाने, जबरन रजिस्ट्री कराने का खेल
हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह और रोहित तोमर तथा उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ पुलिस ने ब्लैकमेलिंग, कर्जा एक्ट सहित संगठित अपराध का मामला दर्ज किया है। दोनों भाई फरार हैं, पुलिस ने उसके भतीजा दिव्यांश तोमर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के भाठागांव स्थित मकान में छापा मारकर पुलिस ने करोड़ों के जेवर-नकदी, महंगी कार, तलवार, पिस्टल-रिवाल्वर आदि के अलावा बड़ी संया में स्टाप पेपर, दूसरों के नाम के कोरा चेक आदि बरामद किए हैं।
मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी डॉक्टर लाल उमेद सिंह ने बताया कि बरामद स्टॉप पेपर के आधार पर पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की। पूछताछ में कर्जा देकर अधिक वसूली, पैसे नहीं देने पर जमीन हथियाने, जबरदस्ती रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया। इसके बाद पुरानीबस्ती पुलिस ने सूदखोर वीरेंद्र, रोहित और दिव्यांश के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। दिव्यांश को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी वीरेंद्र सिंह राष्ट्रीय करणी सेना का प्रदेश अध्यक्ष भी है। आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या से लेकर धोखाधड़ी तक के कई गंभीर अपराध दर्ज हैं।
इस मामले ने एक बार फिर राजधानी में सूदखोरी के बढ़ते जाल और अपराधियों के साथ राजनेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत के मुद्दे को उजागर किया है। सवाल उठता है कि कैसे एक मामूली अंडे का ठेला लगाने वाला इतनी जल्दी करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया और कैसे वह लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के बावजूद कानून के शिकंजे से बचा रहा? यह देखना होगा कि इस मामले में पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है और क्या वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर के खिलाफ ठोस सबूत जुटाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा सकेगा।

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